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हाइलाइट्स

  • पाकिस्‍तानी सीनेट के विवादित मुखिया सादिक सांजरानी ने ओम बिड़ला का न्‍योता ठुकराया
  • सादिक ने कहा कि वह अनुच्‍छेद 370 को खत्‍म करने फैसले के विरोध में नई दिल्‍ली नहीं जा रहे
  • सादिक ने पीएम मोदी की सरकार के खिलाफ कश्‍मीर को लेकर कई जहरीले बयान भी दिए

इस्‍लामाबाद
पाकिस्‍तानी संसद के ऊपरी सदन सीनेट के विवादित मुखिया सादिक सांजरानी ने लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिड़ला के भारत आने के न्‍योते को ठुकरा दिया है। सादिक सांजरानी ने कहा कि वह भारत के अनुच्‍छेद 370 को खत्‍म करने फैसले के विरोध में नई दिल्‍ली की यात्रा पर नहीं जा रहे हैं। सादिक ने पीएम मोदी की सरकार के खिलाफ कश्‍मीर को लेकर कई जहरीले बयान भी दिए।

इससे पहले लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिड़ला ने संसद की लोक लेखा समिति के 100 साल पूरा होने के मौके पर चार-पांच दिसंबर को दिल्ली में होने जा रहे विशेष कार्यक्रम में सादिक को आमंत्रित किया था। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी को भाषण भी देना है। ओम बिड़ला के पाकिस्‍तानी सीनेट अध्‍यक्ष को न्‍योता देने से भारत में विवाद पैदा हो गया था। इससे पहले पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोइद यूसुफ ने भी भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए नई दिल्‍ली में अफगानिस्‍तान पर हुई बैठक में शामिल होने का न्‍योता ठुकरा दिया था।
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पाकिस्‍तानी सेना के बेहद करीब माने जाते हैं सादिक
सीनेट चीफ सादिक सांजरानी पाकिस्‍तानी सेना के बेहद करीब माने जाते हैं। माना जा रहा है कि इस न्‍योते को ठुकरा करके सादिक ने सेना को खुश करने की कोशिश की है। सादिक पाकिस्‍तान के अशांत प्रांत बलूचिस्‍तान से ताल्‍लुक रखते हैं। साल 2019 में पाकिस्‍तान मुस्लिम लीग नवाज और पाकिस्‍तान पीपुल्‍स पार्टी ने आरोप लगाया था कि सीनेट अध्‍यक्ष इमरान खान की सरकार के लिए काम कर रहे हैं। सादिक एक निर्दलीय सांसद हैं। उन पर पाकिस्‍तान में लोकतंत्र को कमजोर करने के भी आरोप लग चुके हैं।

सादिक जम्‍मू-कश्‍मीर को लेकर कई जहरीले बयान दे चुके हैं। एक बार तो सादिक ने ऐलान किया था कि वह दुनिया के सभी सांसदों को पत्र लिखेंगे और उ‍न्‍हें कश्‍मीर में भारतीय सुरक्षा बलों के कथित मानवाधिकार उल्‍लंघनों के बारे में बताएंगे। ओम बिड़ला के इस न्‍योते पर भारत में भी बवाल मच गया था। लोग सवाल कर रहे थे कि जब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में ‘खूनी खेल’ खेल रहा है और निर्दोष नागरिकों की हत्या कर रहा है तो ऐसे में उसे ‘न्योता’ भेजना कहां तक उचित है।



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